मासा के आह्वान पर मज़दूर विरोधी चार लेबर कोड रद्द करने, मज़दूरों के दमन पर रोक लगाने समेत कई मांगों को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन
रुद्रपुर। मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के आह्वान पर मज़दूर विरोधी चार लेबर कोड रद्द करने,निजीकरण बंद करने, मजदूरों के दमन पर रोक लगाने, मज़दूर अधिकारों की बहाली आदि मांगों को लेकर अखिल भारतीय मज़दूर अधिकार दिवस’ पर विरोध प्रदर्शन कर गाँधी पार्क में सभा आयोजित हुई। इसके बाद जुलूस निकाला। इससे पहले आयोजित सभा में मासा के घटक संगठनों सेंटर फॉर स्ट्रगलिंग ट्रेड यूनियंस (सीएसटीयू) के मुकुल और इंक़लाबी मज़दूर केंद्र (आईएमके) के रोहित ने कहा कि विरोधों को नज़रअंदाज़ करते हुए पिछले 21 नवंबर को मोदी सरकार ने पूंजीपतियों के हित में मज़दूर-विरोधी 4 श्रम संहिताओं को दबंगई के साथ लागू कर दिया है। यह भारत के मज़दूर वर्ग पर अबतक का सबसे बड़ा हमला है। इतिहास के इस सबसे कठिन दौर में, जहाँ कॉर्पोरेट पूंजीपतियों का मुनाफा आसमान छू रहा है; वहीं मज़दूरों की नौकरियां छीन रही हैं, मज़दूरी और सामाजिक सुरक्षा घट रही है, काम के घंटे बढ़ रहे हैं। महंगाई व बेरोजगारी बेलगाम है। सरकारी-सार्वजनिक संपत्तियां तेजी से बेची जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी मेहनतकश को वंचित किया जा रहा है। सांप्रदायिक विभाजन तीखा है और मज़दूर तरह-तरह के विभाजनों के शिकार हैं।
वक्ताओं ने कहा कि ऐसे एक कठिन समय में मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) ने मज़दूर अधिकारों को बुलंदी से उठाने का आह्वान किया है। मज़दूर विरोधी चार श्रम संहिताओं की समाप्ति, निजीकरण पर रोक सहित 12 सूत्री केन्द्रीय मांगों के साथ स्थानीय मांगों को लेकर अखिल भारतीय मज़दूर अधिकार दिवस पर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान कई मजदूर नेताओं ने संबोधित किया। इसके बाद शहर में जुलूस निकाला। इस संबंध में 12 सूत्रीय ज्ञापन राष्ट्रपति और 17 सूत्रीय ज्ञापन मुख्यमंत्री उत्तराखंड को भेजा है। यहां पर
धीरज जोशी,रोहित,सुरेन्द्र, कैलाश,दिनेश तिवारी,जीवन लाल,हरपाल सिंह, सुरेश चंद्र पांडे,गंगा सिंह,रविंद्र कुमार, संजय नेगी,दलजीत सिंह, सुनीता,पीसी तिवारी, सुब्रत विश्वास आदि मौजूद रहे।
