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दीपों की जगमगाहट के बीच आज विराजेंगी मां महालक्ष्मी, शाम 5:34 से 8:09 बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त; गणेश आराधना से मिलेगी बुद्धि और समृद्धि

दीपों की जगमगाहट के बीच आज विराजेंगी मां महालक्ष्मी, शाम 5:34 से 8:09 बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त; गणेश आराधना से मिलेगी बुद्धि और समृद्धि

दिल्ली। दीपों की जगमगाहट, रंगोली की खूबसूरती, मिठाइयों की मिठास और अपनों के साथ खुशियों के उत्सव का पर्व दीपावली आज रविवार को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और निराशा पर आशा की विजय का संदेश देने वाला यह पर्व भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं का प्रतीक है। कार्तिक अमावस्या की पावन रात में घर-आंगन दीपों से रोशन होंगे और श्रद्धालु मां महालक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति, धन-धान्य और समृद्धि की कामना करेंगे।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। ऐसी मान्यता है कि जो घर स्वच्छ, सुंदर और प्रकाश से सुसज्जित होता है, वहां मां लक्ष्मी का स्वागत श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है। दीपावली का संबंध भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने से भी जुड़ा है। मान्यता है कि प्रभु श्रीराम के आगमन पर अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीपोत्सव प्रकाश, उल्लास और विजय का प्रतीक बन गया। दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष शुभ माना गया है। इस बार 8 नवंबर को शाम 5 बजकर 34 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। इस प्रकार श्रद्धालुओं को लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए लगभग दो घंटे 35 मिनट का समय मिलेगा। वहीं, वृषभ काल शाम 5 बजकर 54 मिनट से रात 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन करना विशेष फलदायी माना जाता है। अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 9 नवंबर की रात 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा निशीथ काल रात 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। दीपावली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा सदियों पुरानी है। मां लक्ष्मी को धन, वैभव और संपत्ति की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और शुभारंभ के प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यता है कि धन के साथ सद्बुद्धि होना भी आवश्यक है, ताकि अर्जित संपत्ति का सही उपयोग किया जा सके। इसी कारण दीपावली पर सबसे पहले गणेश जी का पूजन और इसके बाद मां लक्ष्मी की आराधना की जाती है। धार्मिक परंपराओं में कमल के फूल को मां लक्ष्मी का प्रिय पुष्प माना गया है। कमल गट्टे की माला से मंत्र जाप और पूजा करने की भी विशेष मान्यता है। इसके अलावा माता को चावल की खीर, मखाना, खील, बताशे, नारियल और मीठा पान अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भोग लगाकर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।पूजा के लिए घर की पूर्व दिशा अथवा ईशान कोण में चौकी स्थापित कर उस पर लाल या गुलाबी वस्त्र बिछाया जाता है। चौकी पर भगवान गणेश और उनके दाहिनी ओर मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। इसके बाद पूजा का संकल्प लेकर जल, पुष्प और मिठाई अर्पित की जाती है। सबसे पहले गणेश मंत्रों और फिर मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप किया जाता है। अंत में दोनों की आरती उतारकर शंख बजाया जाता है। दीपावली पर मुख्य पूजा स्थल में घी का दीपक जलाने के साथ घर के अलग-अलग हिस्सों, मंदिर और आंगन में भी दीप प्रज्वलित किए जाते हैं। दीप जलाते समय श्रद्धालु ‘शुभं करोति कल्याणं, आरोग्यं धनसंपदा’ मंत्र का जाप कर सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं। दीपावली केवल धन और वैभव पाने का पर्व नहीं, बल्कि परिवार, समाज और रिश्तों में प्रेम तथा सद्भाव बढ़ाने का भी संदेश देती है। मिट्टी के दीपक जलाकर पर्यावरण और परंपरा से जुड़ने का अवसर देने वाला यह त्योहार हमें सिखाता है कि जीवन में खुशियों का वास्तविक प्रकाश प्रेम, सद्भाव, सेवा और सकारात्मक सोच से आता है।

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