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दिवाली मिलन से सियासी गर्माहट: दिल्ली में राहुल गांधी से मिले हरीश रावत, आत्मीय भेंट के बीच भविष्य की रणनीतियों पर मंथन

दिवाली मिलन से सियासी गर्माहट: दिल्ली में राहुल गांधी से मिले हरीश रावत, आत्मीय भेंट के बीच भविष्य की रणनीतियों पर मंथन

नई दिल्ली। त्योहारों का मौसम जहाँ एक ओर देश भर में मेल-मिलाप, रोशनी और खुशियों का संदेश लेकर आता है, वहीं राजनीति के गलियारों में यह अवसर आपसी सौहार्द के साथ-साथ भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों की पटकथा लिखने का भी जरिया बन जाता है। दीपावली के पावन पर्व की बेला में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कुछ ऐसा ही राजनीतिक दृश्य देखने को मिला, जब उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से आत्मीय मुलाकात की।

इस विशेष मुलाकात के दौरान हरीश रावत ने राहुल गांधी को धनतेरस और दीपावली की आत्मीय शुभकामनाएं दीं तथा उन्हें पारंपरिक त्योहारों की मिठाई भेंट की। हरीश रावत ने इस भेंट को केवल एक औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित न रखते हुए इसे सकारात्मक संकल्प और आत्मीयता का पल बताया। उन्होंने राहुल गांधी को हाल ही में आयोजित हुई उनकी अभूतपूर्व सफल रैलियों के लिए भी बधाई दी। मीडिया और राजनीतिक हलकों में हरीश रावत द्वारा राहुल गांधी को “संघर्ष, लोकतांत्रिक मूल्यों और देश के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदों का प्रतीक” करार देना इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं का केंद्रीय नेतृत्व के प्रति अटूट विश्वास और समर्थन किस स्तर पर है। यह मुलाकात दरअसल उस बड़े ‘दिवाली मिलन’ समारोह की कड़ी का हिस्सा थी, जो राहुल गांधी ने अपने आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लिए आयोजित किया था। इस चाय पर आयोजित अनौपचारिक मिलन समारोह में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश, सचिन पायलट, कुमारी शैलजा और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू समेत पार्टी के कई दिग्गज नेता एक मंच पर नजर आए। इस दौरान नेताओं ने न केवल एक-दूसरे को दीपावली की बधाइयाँ दीं, बल्कि आपसी सौहार्द और भाईचारे की मिसाल भी पेश की। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस प्रकार की बैठकों के केवल सांस्कृतिक मायने नहीं निकाले जाते। सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि इस अनौपचारिक संवाद के दौरान देश की समसामयिक राजनीतिक परिस्थितियों, मुख्य चुनाव आयुक्त, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण तथा विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे ‘वोट चोरी’ जैसे गंभीर मुद्दों पर भी अनौपचारिक चर्चा हुई। इन विषयों को लेकर कांग्रेस पार्टी की आगामी रणनीतियों और जनांदोलनों की रूपरेखा पर भी विचार-विमर्श किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जब राजनीतिक दल त्योहारों के बहाने अपनी संगठनात्मक एकजुटता का प्रदर्शन करते हैं, तो उसका असर दूरगामी होता है। एक तरफ जहां यह आयोजन पार्टी के भीतर आपसी संवाद को मजबूत करने वाला साबित हुआ, वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के वरिष्ठ नेता का केंद्रीय नेतृत्व से इस प्रकार मिलना राज्य की राजनीति में भी नए संदेश दे रहा है। दीपावली की इस रोशनी के बीच कांग्रेस खेमे में आपसी मेल-मिलाप और राजनीतिक संवाद का यह दौर आने वाले दिनों में राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर किस प्रकार का प्रभाव डालेगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। फिलहाल, इस मुलाकात ने दिल्ली के सियासी पारे को जरूर गरमा दिया है।

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