खटीमा। ‘पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं’—इस कहावत को देवभूमि उत्तराखंड के सीमांत शहर खटीमा के एक होनहार युवा ने शत-प्रतिशत सच साबित कर दिखाया है। खटीमा की सैनिक कॉलोनी (अमाऊं) निवासी जतिन सिंह भाट ने देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित मानी जाने वाली राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की परीक्षा में ऑल इंडिया 11वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है। पूर्व सैनिक के घर जन्मे इस युवा की यह असाधारण सफलता न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे उत्तराखंड राज्य के लिए गर्व का क्षण है।

जतिन की यह सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि पक्के इरादे, कड़ी मेहनत और निरंतरता को अपना हथियार बना लिया जाए, तो संसाधनों की सीमाएं कभी भी सपनों के आड़े नहीं आतीं। जतिन के पिता नारायण भाट भारतीय सेना से हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। देशभक्ति और अनुशासन की जो घुट्टी उन्हें परिवार से मिली थी, उसी के बलबूते उन्होंने यह ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। जब जतिन ने अपनी इस सफलता के बाद अपने विद्यालय में कदम रखा, तो वहाँ का माहौल किसी बड़े पर्व से कम नहीं था। ढोल-दमाऊ की थाप, पारंपरिक छोलिया नृत्य की गूंज, एनसीसी कैडेट्स का जोश और शिक्षकों की आंखों में गर्व के आंसू—यह दृश्य बयां कर रहा था कि इस सफलता ने पूरे क्षेत्र को कितना सराबोर कर दिया है। स्कूल परिसर में शिक्षकों, प्रबंधकों और स्थानीय गणमान्य लोगों ने जतिन और उनके माता-पिता का माल्यार्पण कर और अंगवस्त्र भेंटकर भव्य अभिनंदन किया। जतिन की माता गीता भाट की यह भावना कि उन्हें यह सब किसी सपने जैसा लग रहा है, वास्तव में एक मां के उन वर्षों के त्याग और संघर्ष का प्रतिफल है, जो उसने अपने बेटे के उज्ज्वल भविष्य के लिए किए थे। वहीं, बेहद आड़े वक्त में भी संयम और लगन का दामन न छोड़ने वाले जतिन ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया है। आने वाली पीढ़ी के लिए उनका यह संदेश बहुत गहरा है कि डिफेंस या किसी भी क्षेत्र में सफलता का शॉर्टकट नहीं होता; इसके लिए निरंतरता, अनुशासन और अपने लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण की आवश्यकता होती है। उत्तराखंड की माटी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है तो बस उस छिपी हुई ऊर्जा को सही दिशा और अवसर देने की। जतिन भाट की यह उपलब्धि सीमांत क्षेत्रों के उन तमाम युवाओं के लिए एक मशाल है, जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं। जतिन का यह सफर अभी महज एक शुरुआत है, और देश को पूरा विश्वास है कि भविष्य में यह युवा अधिकारी भारतीय सेना के सर्वोच्च पदों को सुशोभित कर देश की आन, बान और शान की रक्षा करेगा। खटीमा का यह सितारा आज हर युवा की प्रेरणा बन चुका है।



